Amitabh Bachchan gets discharged from hospital, writes a heart wrenching poem


Nation Next Newsroom | Feb 10, 2018 6:02

Bachchan
Amitabh Bachchan after getting discharged from Lilavati Hospital

Amitabh Bachchan, who was admitted to Lilavati Hospital on Friday in Mumbai, after he went for a routine check up, got discharged yesterday. The senior actor after getting discharged posted a poem on his blog where he shared his experience of visiting the hospital. Through his poem, he also expressed his astonishment when the media outside the hospital tried to click his pictures.

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As per IANS, the senior actor, who was accompanied by son Abhishek, was admitted after complaining of lower back pain. According to a report in Republic, gastro intestinal and liver specialist Dr Jayant Barve is in charge of Bachchan’s medical case. Even in 2017, Bachchan was hospitalised pertaining to certain health issues.

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In 2015, Bachchan shocked everyone when he revealed that he’s surviving only on 25 per cent liver after having lost the rest 75 percent to the deadly Hepatitis B virus after the near fatal accident on the sets of Coolie in 1982.

 

Here’s the poem, which the senior actor shared through his blog:

जी हाँ जनाब मैं अस्पताल जाता हूँ

बचपन से ही इस प्रतिकिया को जीवित रखता हूँ ,

वहीं तो हुई थी मेरी प्रथम पयदाइशि चीत कार

वहीं तो हुआ था अविरल जीवन का मेरा स्वीकार

इस पवित्र स्थल का अभिनंदन करता हूँ मैं

जहाँ इस्वर बनाई प्रतिमा की जाँच होती है तय

धन्य है वे ,

धन्य हैं वे

जिन्हें आत्मा को जीवित रखने का सौभाग्य मिला

भाग्य शाली हैं वे जिन्हें , उन्हें सौभाग्य देने का सौभाग्य ना मिला

बनी रहे ये प्रतिक्रिया अनंत जन जात को

ना देखें ये कभी अस्वस्थता के चंडाल को

पहुँच गया आज रात्रि को Lilavati के प्रांगण में

देव समान दिव्यों के दर्शन करने के लिए मैं

विस्तार से देवी देवों से परिचय हुआ

उनकी वचन वाणी से आश्रय मिला

निकला जब चौ पहियों के वाहन में बाहर ,

‘रास्ता रोको’ का ऐलान किया पत्र मंडली ने जर्जर

चाका चौंद कर देने वाले हथियार बरसाते हैं ये

मानो सीमा पार कर देने का दंड देना चाहते हैं वे

समझ आता है मुझे इनका व्यवहार ;

समझ आता है मुझे, इनका व्याहार

प्रत्येक छवि वार है ये उनका व्यवसाय आधार ,

बाधा ना डालूँगा उनकी नित्य क्रिया पर कभी

प्रार्थना है बस इतनी उनसे मगर , सभी

नेत्र हीन कर डालोगे तुम हमारी दिशा दृष्टि को

यदि यूँ अकिंचन चलाते रहोगे अपने अवज़ार को

हमारी रक्षा का है बस भैया, एक ही उपाय ,

इस बुनी हुई प्रमस्तिष्क साया रूपी कवच के सिवाय

– Amitabh Bachchan